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Sunday, August 4, 2019

Water Cement Ratio (जल - सीमेंट अनुपात) क्या हैं?


Water Cement Ratio (जल - सीमेंट अनुपात) क्या हैं?

नमस्कार दोस्तों The Civil Construction   के इस नये आर्टिकल  में आपका स्वागत करता हूँ।
जो कि Water Cement Ratio के बारे में है ।

 हमारे इस आर्टिकल का हिस्सा बनने के लिए  मैं  Akash आपका आभार प्रकट करता हूँ ।
आज हम Water Cement Ratio(जल - सीमेंट अनुपात) के बारे में बात
 करने वाले है ।

 प्रो० अब्राम ( Abram D . A ) ने 1919 में अनुसंधानों के आधार पर इस धारणा को ,
 कि कंक्रीट की सामर्थ्य केवल सीमेंट की मात्रा पर निर्भर करती है , गलत सिद्ध किया ।
 उसने बताया कि समान कंक्रीट संघटकों व समान परीक्षण स्थितियों में कंक्रीट की सामर्थ्य केवल इस में प्रयुक्त जल की मात्रा पर निर्भर करती है , बशर्ते कंक्रीट सुघट्य वसुकरता की सीमा में बनी रहे।
जल की मात्रा सीमेंट के भार के अनुपात में व्यक्त की गयी ।

       प्रो० अब्राम के अनुसार , जब हम कंक्रीट को सामर्थ्यवान बनाने के लिये , इसमें अधिक सीमेंट डालते हैं , तो वास्तव में हम जल सीमेंट अनुपात घटा रहे हैं ।
 कंक्रीट की सामर्थ्य का पानी की मात्रा से गहरा सम्बन्ध है । सीमेंट की जलयोजन क्रिया के लिये ,जल की एक निश्चित मात्रा की आवश्यकता पड़ती है ।जल की मात्रा कम होने पर कंक्रीट सख्त (Harsh) बनेगी , जिससे यह सुकर नहीं रहेगी । जल की मात्रा अधिक होने पर , कंक्रीट में पृथक्करण ( Segregation ) व उत्स्रवण ( Bleeding ) होने लगता है ।


परिभाषा :-
 कंक्रीट मिश्रण में भार के अनुसार जल व सीमेंट का अनुपात , जल - सीमेंट अनुपात कहलाता है , अर्थात्


 जल : सीमेंट अनुपात ( W / C Ratio )
                                 
                         =जल का भार/सीमेंट का भार
                        =Wt .of Water/Wt . of Cement

 जल सीमेंट अनुपात को कंक्रीट में पानी की मात्रा भी कहते हैं।

स्पष्टीकरण :-

यदि जल : सीमेंट अनुपात 0 . 4 रखा गया है तो इसका अर्थ है एक बोरा  सीमेंट ( 50 kg ) में 50 x 0 . 4 = 20 लीटर पानी मिलाया जायेगा ( 1 kg पानी = 1 लीटर )
  उपरोक्त जल की मात्रा में, मिलावे में विद्यमान नमी (Moisture) सम्मिलित नहीं है ।
 मिलावे में उपस्थित नमी को दृष्टि में रखते हुए , जल - सीमेंट अनुपात का मान संशोधित किया जाता है ।

जल - सीमेट अनुपात नियम ( Water - Cement Ratio Law ) :

 जैसा ऊपर बताया गया है , कंक्रीट की सामर्थ्य जल - सीमेंट अनुपात से नियन्त्रित होती है ।
 इस सम्बन्ध में प्रो० अब्राम ने सन् 1919 में परीक्षणों के आधार पर निम्न नियम स्थापित किया "निर्दोष मिलावे से बनायी गयी व भली - भाँति कूटी गयी कंक्रीट की सामर्थ्य  व  अन्य अभिलक्षणकेवल जल - सीमेंट अनुपात पर निर्भर
 करते हैं , बशर्ते कंक्रीट सुघट्य व सुकर हो"


 उपरोक्त नियमानुसार कंक्रीट की सामर्थ्य निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात की जा सकती है
                                              
                                    P=984/4x

 जहाँ
  P = कंक्रीट की 28 दिन को तराई पर सम्पीडन सामर्थ्य ,Kg/cm²
  X = जल सीमेंट अनुपात ।


जल - सीमेंट अनुपात नियम  की  सीमायें
 ( Limitations of w / C Ratio Law ) :-

  प्रो०अब्राम के अनुसार कंक्रीट की सामर्थ्य  जल - सीमेट अनुपात पर निर्भर करती है और इन सीमेट अनुपात नियम तभी वैध माना जाता है जब –
·         कंक्रीट के संघटक निर्दोष व गुणवान हो ।
·         कंक्रीट की सुघट्यता , सुकार्यता की सीमा में हो ।
·         कंक्रीट की कुटाई व तराई मानक स्थितियों में की गयी हो ।
·          
कंक्रीट की सामर्थ्य के विकास का स्वरूप जानने के लिये निम्न बातों का अध्ययन
आवश्यक है।

·         कंक्रीट की आन्तरिक नमी की जलयोजन क्रिया पर प्रभाव ,
·         तापक्रम का जलयोजन क्रिया पर प्रभाव ,
·         कंक्रीट की सामर्थ्य पर कुटाई का प्रभाव ,
·         कंक्रीट की सामर्थ्य पर आयु का प्रभाव ,
·         कंक्रीट की सामर्थ्य पर प्रतिदर्श की माप का प्रभाव ।


सावधानी:-
ध्यान रहे जल सीमेंट अनुपात नियम की जाँच करते समय प्रतिदर्श का आकार ,
 क्षेत्र या प्रयोगशाला स्थल पर परीक्षण की व्यवस्था , सुकार्यता , कुटाई , तराई आदि
 क्रियाये समान परिस्थितियों में सम्पन्न की जानी चाहिये ।

     दोस्तों आज के आर्टिकल में बस इतना ही आने वाले और भी आर्टिकल में
एक और नये के साथ हाजिर होऊंगा । 
                
उम्मीद करता हु यह आर्टिकल आपसभी को अच्छा लगा होगा और आपने  बहुत सी जानकारी
भी प्राप्त की होगी ।
किसी भी सुझाव के लिए निचे दिए Comment Box में Comment करे और अधिक से अधिक शेयर करे

धन्यवाद,
                                                                                                              जय हिन्द

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